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सोमवार, 24 सितंबर 2012



                                     आज का सबक 

दीप गीतिका से बहुत प्यार करता है . लेकिन ये प्यार ऐसा नहीं कि जिसमे प्यार के बदले प्यार माँगा  जाए . इसीलिए उसने कभी पहल नहीं की. जब  पहल गीतिका ने की तो उसने सिर्फ़ इतना कहा कि मैं अपना पचास प्रतिशत तो जानता हूँ कि हाँ - मैं तुमसे प्यार करता हूँ बाकी के पचास प्रतिशत का पता नहीं.  फिर ना जाने ये सच था या कोई खवाब कि उसे शत प्रतिशत प्यार महसूस होने लगा. कुछ दिन प्यार में ऐसे  बीते  जैसे वक़्त को पंख लग गए हों. किसी ने कहा भी है और दीप भी यही मानता है कि अच्छे दिन बड़ी जल्दी गुज़र जाते हैं.
फ़ोन पर कोई भी मेसेज आता तो दीप को लगता कि गीतिका का ही होगा . उसने एक सर्विस ले रखी थी जिसका मेसेज रोज सुबह ज़रूर आता था . दीप  को उस मेसेज की तरह गीतिका के मेसेज की भी आदत हो गई थी . मगर इसमें फर्क ये था कि गीतिका के मेसेज सिर्फ़ एक बार नहीं आते थे .
वो कहते हैं ना कि बिन मांगे मोती मिले और मांगे मिले ना भीख. दीप को उम्मीद ही नहीं थी कि गीतिका से कभी मुलाक़ात भी होगी और इतनी जल्दी होगी ये उम्मीद  तो कतई नहीं थी . लेकिन जब जब जो जो होना है तब तब सो सो होय . एक दिन गीतिका ने बताया कि वो दिल्ली आ गई है . फिर भी दीप ने मिलने की नहीं सोची क्योंकि वो जान गया था कि गीतिका पढने आई है . लेकिन जब गीतिका ने कहा तो वो कैसे इनकार कर पाता . आखिर वो तो ज्यादा चाहता था मिलना मगर कह नहीं सकता था. फिर तो एक नहीं कई बार मुलाक़ात हुई.  बारिश में एक साथ भीगते, साथ शोपिंग करते और खाना खाते दीप ने एक नहीं कई ज़िन्दगी जी ली . मगर उसने  कभी नहीं सोचा था कि ये दिन भी बहुत जल्दी बीत जायेंगे. या हो सकता है कि वो सच्चाई से आँख मूंदे बैठा हो . जैसे कबूतर बिल्ली को देखकर उड़ने के बजाये आँख मूँद लेता है और सोचता है --- तुझे बिल्ली नज़र नहीं आ रही तो बिल्ली को भी तू नज़र नहीं आ रहा होगा . लेकिन आँख मूंदने से बीली ना दीखती या  वक़्त थमा करता तो सभी आँख मूँद लेते .
वैसे  दीप ने गीतिका को ये बात बहुत साफ़ बता दी थी कि ये दीवानों वाला या आँख मूँद कर किया गया प्यार नहीं है इसलिए तुम पहले अपने कैरिअर पर ध्यान दो क्योंकि ज़िन्दगी में किसी भी बात से ज़रूरी अपने पाँव पे खड़ा होना है . दीप को तब अच्छा भी लगा  जब गीतिका इस बात को  समझ गई . लेकिन गीतिका कभी कभी दीप को डिसेंट कहती तो उसे अटपटा सा लगता . लेकिन उसे अपने प्यार पे पूरा यकीन था . इसलिए जब गीतिका ने इ - मेल से भेजे गए कार्ड देखने बंद कर दिए तो दीप ने सोचा कि वो अपनी पढ़ाई पे ध्यान दे रही होगी.  फिर उसने दीप के छह अक्षरों का जवाब देना भी बंद कर दिया.
जी हाँ छह शब्द नहीं छह अक्षर . इन्टरनेट ने शब्दों को कितना छोटा कर दिया है  . अंग्रेजी का  गुड नाईट ( जी ओ ओ डी एन आई जी एच टी  ) जाने कब से  गुड नाईट ( जी यु  डी एन  वाई  टी  ) और गुड मोर्निंग ( जी ओ ओ डी     एम ओ आर एन आई एन जी ) कब से गुड मोर्निंग ( जी यु  डी एम एन  जी )  होकर छह अक्षर का रह गया है.

दीप ने सोचा  कि प्यार का मतलब माँगना नहीं बल्कि देना होता है . इसलिए दीपिका के लिए अच्छी रात और अच्छे दिन की दुआ करता रहा. उसने गीतिका से बात करना बिलकुल बंद कर दिया . मेसेज  से भी बात बंद कर दी ताकि गीतिका की पढ़ाई में बाधा ना पड़े . कहाँ तो रात दिन मेसेज और चैटिंग और कहाँ सिर्फ़ छह अक्षर . लेकिन दीप सोचता कि और भी गम हैं ज़माने में .------- ज़िन्दगी प्यार के अलावा भी बहुत कुछ है . कुछ काम प्यार जितने ही ज़रूरी होते हैं और गीतिका उसी ज़रूरी काम में बिजी है .
दीप और गीतिका के बीच प्यार अब छह अक्षरों तक सिमट गया था. वो रोज सुबह शाम गुड मोर्निंग और गुड नाईट लिख कर मेसेज करना नहीं भूलता था . महीनो यह सिलसिला चलता रहा. और वो - अपनी धुन में रहता हूँ - ग़ज़ल की तरह अपनी धुन में ही रहा. लेकिन इस बीच गंगा जमुना में शायद कितना पानी बह चुका था उसको ये खबर नहीं थी . उसकी आँख तब खुली जब एक दिन सुबह सुबह चैटिंग पे मेसेज आया.
  दीप ने सोचा कि कहीं गीतिका बोर तो नहीं हो गई पढ़ाई से ? क्योंकि  बहुत   पहले जब बात होती थी तो वो बोर होकर ही बात करती थी .वो बहुत हिम्मत वाली है मगर बैट्री  की तरह चार्ज  करनी पड़ती है .  इसलिए इतने दिन बाद मेसेज से दीप को यही लगा  की उसे समझाऊंगा .  लेकिन मेसेज पढ़ते ही उसकी आँख खुली  की खुली  रह गई.
प्लीज मेसेज मत किया करो . आई एम वैरी बिज़ी दीज  डेज .
उसने आखें माली और फिर से मेसेज पढ़ा . लेकिन मेसेज यही था ---
प्लीज मेसेज मत किया करो . आई एम वैरी बिज़ी दीज  डेज .
दीप ने एक बार तो सोचा कि तुरंत जवाब दे दे . लेकिन जब मेसेज करने को मना ही कर दिया तो ---- क्या किया जाए ? उसने सोचा कि गरम रोटी खाने से मुंह जल जाता है इसलिए बहुत सोच कर ही कुछ क़दम उठाऊंगा . वो दिन भर सोचता रहा मगर कुछ नहीं सूझा . आखिर शाम के वक़्त उसने मूड फ्रेश करने के लिए गाने लगाए तो पहले ही गाने से उसे राह सूझ गई.

चलो एक बार फिर से अजनबी बन जाएँ हम दोनों
वो अफसाना जिसे अंजाम तक लाना ना हो मुमकिन
उसे एक खूबसूरत मोड़ देकर छोड़ना अच्छा .

दीप ने गाना बंद किया और मेल ओपन किया . मेल ओपन करके गीतिका का मेल और चैट  दोनों ब्लोक कर दिए. शायद इस प्रेम कहानी के पचास प्रतिशत का इस से अच्छा मोड़ नहीं हो सकता था. रहा बाकी पचास प्रतिशत वो तो था और हमेशा रहेगा , इसलिए तो कहानी के शुरू में प्यार करता है लिखा . जो भी  हो इस कहानी  से दीप ने तो यही सबक सीखा  कि जो रिश्ता  दोनों तरफ से ना निभ सके उसे एक खूबसूरत मोड़ पर छोड़ देना बेहतर है क्योंकि ऐसा करने से वो पचास प्रतिशत तो बचा रहता है . वैसे भी  ज़िन्दगी में कुछ भी मुकम्मल नहीं होता इसलिए सारे के पीछे भागने से बेहतर है आधे में ही  सब्र  करना .